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Sunday, June 29, 2014

राजनीति में सभी खपने लगे !

राजनीति में सभी खपने लगे !

भक्त को भगवन बना जपने लगे 
खुद है भगवन जाप फिर रटने लगे 

'संस्कार' अंतिम ही उसको जानिये  
'अच्छी' बातें 'गंदी' जब लगने लगे  

कर्ण-प्रिय वाणी थी और अमृत वचन   
अब तो हर-हर शब्द में हगने लगे 

संत में आसक्तियां जगने लगी 
आस्थाओं के दिये बुझने लगे  

मांगे बिन ही जब मुरादें मिल गयी !
'साँई'  उनको ग़ैर अब लगने लगे 

'शून्य' से निर्मित हुई है कायनात 
खोज फिर उस 'शून्य' की करने लगे !

 --मंसूर अली हाश्मी   
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