Google+ Badge

Showing posts with label unexpected reward. Show all posts
Showing posts with label unexpected reward. Show all posts

Monday, December 23, 2013

'waal' पर लिक्खा हुआ अब 'केजरी' पढ़ना पड़ा !





'waal' पर लिक्खा हुआ अब 'केजरी' पढ़ना पड़ा !

'आप' को आना पड़ेगा; आप को आना पड़ा 
'भ्रष्ट' थे 'आचार' जिनके; उनको तो जाना पड़ा। 

वस्तुएं महंगी हुई, ईमान जब सस्ता हुआ ,
सेब सस्ता प्याज़ से होना बड़ा महंगा पड़ा !

'हाथ' को मलते हुए ; मुरझाते देखा 'फूल'* को         *कमल 
भाग्य में बिल्ली के छीका, दिल्ली में, टूटा, पड़ा!
-Mansoor ali Hashmi
http://mansooralihashmi.blogspot.in