Google+ Badge

Showing posts with label demo cracy ?. Show all posts
Showing posts with label demo cracy ?. Show all posts

Thursday, September 22, 2011

Alas !

बे मेल !






खूँटी' मिल न पायी जब आस्था की 'टोपी' को,
'मुल्ला' की मलामत की, और कौसा 'मोदी' को.

दौर 'अनशनो' का है, त्याग कर ये रोटी को,
फिक्स कर रहे है सब, अपनी-अपनी गोटी को.

'शास्त्र' से न था रिश्ता, 'शस्त्र' लाना भूले थे,  
इक ने खींची दाढ़ी तो, दूसरे ने चोटी को.

जोड़े यूं भी बनते है, जोड़ जब नहीं मिलती,
मोटा लाये मरियल सी, दुबला पाए मोटी को.

'बड़की'* से ब्याहने जो रथ पे चढ़ने आया था,   
 लौटना पड़ा उसको साथ लेके 'छोटी' को.

* {पी.एम्. की गद्दी}
Note: {Picture have been used for educational and non profit activies. If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture.}
mansoor ali hashmi 

Friday, July 8, 2011

बुढ्ढा होगा तेरा बाप!

बुढ्ढा होगा तेरा बाप!

बुढ्ढा होगया मैरा बाप,
टूटी लाठी मरा न सांप*,        *[भ्रष्टाचार का]
तीन बचे है* गुज़रे सात,         *[यू.पी.ए. का कार्यकाल]
अम्मा-अम्मा करके जाप.



बाक़ी अभी तलक विशवास,
बाबा-अन्ना पर है आस,
अब तो हम ख़ुद के ही दास,
न होना 'दास मलूका' उदास.
सबसे बड़ा है अपना बाप!

--mansoor ali hashmi