Google+ Badge

Showing posts with label current affairs. Show all posts
Showing posts with label current affairs. Show all posts

Tuesday, May 29, 2012

क्या कह रहे है आप !

"कमाल तकियाकलाम का"- वडनेरकर जी के 'तकिये' पर मेरा 'कलाम' मुलाहिजा फरमाए:-
क्या कह रहे है आप !
[तकिया कलाम मुझको बहुत नापसंद है,
सुनलो ! कि अपनी बात मै दोहराता नहीं हूँ.]

फिक्सिंग का बोल-बाला है, "क्या कह रहे है आप !"
'छक्के' पे नाचे 'बाला' है, "क्या कह रहे है आप !"'
सच्चे का मुंह काला है, "क्या कह रहे है आप !"
डाकू के हाथ 'माला' है, "क्या कह रहे है आप !"
'ठंडा', 'गरम-मसाला' है, "क्या कह रहे है आप !"
'नेता' भी उनका 'साला' है, "क्या कह रहे है आप !"
'रुपया' हमारा 'काला' है, "क्या कह रहे है आप !"
'बाबाओं' से घोटाला है, "क्या कह रहे है आप !"
'आदर्श'{!} इकत्तीस 'माला' है, "क्या कह रहे है आप !"
'मुन्सिफ' के मुंह पे ताला है, ''क्या कह रहे है आप !"
लैला ने कुत्ता पाला है, "क्या कह रहे है आप !"













'बुधिया' के घर उजाला है," क्या कह रहे है आप !"
पक्की सड़क पे नाला है, "क्या कह रहे है आप !"
'मन-मोहिनी' दिवाला है, "क्या कह रहे है आप !"
'धंधा' तो बस, 'हवाला' है, "क्या कह रहे है आप !"
'निर्मल' बड़ा निराला है, "क्या कह रहे है आप !"
चारो तरफ ही "जाला" है, "सच कह रहे है आप !"
------------------------------------------------------------------
चौपाई
-------------------
'तकिया' करे 'कलाम' पे फिर चाहते है 'वो'*,          *[BJP]
पहले भी ख़ूब गुज़री है, इस 'मेजबाँ' के साथ,
'दादा*-व्-संगमा' तो है "थैली" से एक ही !             *[प्रणब] 
शायद के 'पलटे दिन' भी, फिर इस मेहरबाँ के साथ !! ------------------------------------------------------------
Note: {Pictures have been used for educational and non profit activies.
If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture.}
mansoor ali hashmi

Thursday, September 1, 2011

SEASON'S GREETINGS


गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर सभी ब्लागर साथियो और देश वासियों को हार्दिक बधाई. 
पटाखा छोड़ा, निकली 'सुरसुरी' है !
लड़ाई ये हमारी ख़ुद से ही है,
ये 'रिश्वत' तो हमी ने दी है, ली है.

मिले जो 'आश्वासन' सब हसीं है,
मगर उसमे भी लगती कुछ कमी है.

बनाया इसको जनता ने सही पर,
ये 'संसद' अब तो उससे भी बड़ी है.

कभी 'टूटा', कभी 'तोड़ा' गया है,
है 'अनशन' तो पुराना, रुत नई है.

वो 'टोपी' जिससे नफरत हो रही थी,
उसे 'अन्ना' की खातिर पहन ली है.

'चतुर्थी', 'ईद', पर्युशन' का मौसम,
अमन है, शान्ति है, ज़िन्दगी है.

न हाकी, रेस, न ही भांगड़ा है,
प्राजी!*, ये घड़ी क्यों रुक गयी है.        *[पंजाब वासी]

सियासत ही में बाज़ी आजमाए,
दिगर खेलो में हारा 'हाशमी' है.

-मंसूर अली हाशमी 

Friday, June 24, 2011

Reincarnation !!!


हड़बड़ी ही हड़बड़ी !


फिर जनम होगा - न होगा बात जब ये चल पड़ी,*   
सौ ब्लॉगर कूद आये, मच गयी है हड़बड़ी .

'आस्तिक' की बात को लेकर परीशाँ  'नास्तिक,
एक को दूजे में दिखने लग गयी है गड़बड़ी.

'मुस्कराहट' मुझको अपनी इस तरह महँगी पड़ी,
दाँत चमकाने कि ख़ातिर COLGATE लेनी पड़ी.  

पासपोर्ट बनवाना भी मुझको बहुत महंगा पड़ा ,
शाला से थाने तलक जब रिश्वते देनी पड़ी !

दोस्तों 'टिप्याना' भी मुझको तो रास आया नहीं,
कितनी ही कविताए मैरी आज तक सूनी पड़ी.

चित्र अपने ब्लॉग पर तकलीफ का बाईस बना,
याद 'दादा जान' आये, देखी जब दाढ़ी मैरी !

खूबसूरत लेख था, सूरत से लगती जलपरी,
कद्दू से मोटी वो निकली, लगती थी जो फुलझड़ी. 


* http://zealzen.blogspot.com/2011/06/blog-post_22.html?showComment=1308888740834#c3518290395088571464
 

mansoor ali hashmi 

Friday, June 17, 2011

Fasting...!


अनशन ही अनशन 

सच की पगड़ी हो रही नीलाम है,
'भ्रष्ट' को अब मिल रहा इनआम है.

अब 'सियासत' अनशनो का नाम है,
देश से मतलब किसे! क्या काम है?

तौड़ कर अनशन भी शोहरत पा गया ,
एक* मर कर भी रहा गुमनाम है!          [*निगमानंद]

दूसरे अनशन की तैयारी करो,
गर्म 'लोहे' का यही पैग़ाम है.

'अन्शनी' में सनसनी तो है बहुत,
'फुसफुसा' लेकिन मगर अंजाम है. 

'आग्रह सच्चाई का'  करते रहो,
झूठ तो, नाकाम है-नाकाम है.

स्वार्थ को ऊपर रखे जो देश के,
दूर से उनको मेरा प्रणाम है.

-- मंसूर अली हाश्मी 

Monday, June 6, 2011

क्यूँ चारो तरफ फैला है भरम?


क्यूँ  चारो तरफ फैला है भरम?

'अन्ना' पे करम, 'बाबा' पे सितम ,
'अम्मा' इस तरह करना न ज़ुलम!

'पैसा' है सनम, 'योगा' से शरम,
'मन'* है तुझको कैसा ये भरम ?           [*PM]

'भगवे' से हुआ ख़तरा पैदा,
'शलवार'* ने रखली 'उनकी' शरम.        *[बाबा रामदेव]

रक्षा करना थी देश की जब,
'आँचल' को बना डाला परचम.

स्वागत करके लाये थे जिसे,
छोड़ा उसको हरि  के द्वारम.

'अनशन' करने से रोको नही,
'सेवा' करना ही जिनका 'धरम'.
-- mansoor ali hashmi 

Sunday, April 10, 2011

एक अण्णा हज़ार बीमार


एक अण्णा  हज़ार बीमार   

सौ है बीमार एक अनार है आज,
सरे फेहरिस्त भ्रष्टाचार है आज.

छोड़ गुलशन निकल पड़ा आख़िर,  
गुल को खारों पे इख्तियार है आज.

मरता, करता न क्यां! दहाढ़ उठा!
हौसला कितना बेशुमार है आज.

हक़ परस्ती की बात करता है !
कोई 'मंसूर' सू -ए- दार है आज?

दरिया बिफरा ज़मीं में कम्पन है,
क्यों फ़िज़ा इतनी बेक़रार है आज.

गिरती क़द्रें है; बढ़ती महंगाई,
मुल्क में कैसा इन्तिशार है आज !

दंगा 'सट्टे' पे, जाँ 'सुपारी' एवज़ !
फिर छपा एक इश्तेहार है आज.

जिस्म बीमार; रूह अफ्सुर्दः
इक मसीहा का इंतज़ार है आज. 

'अक्लमंदों' का अब कहाँ फुक्दान*     *[कमी]
एक धूँदो मिले हज़ार है आज. 

-mansoor ali hashmi

Sunday, March 28, 2010

आज कल / Now a Days


 आज कल 

ब्लोगेर्स:
छप-छपाना, न हुआ जिनको नसीब,
बज़ बज़ाते फिर रहे है इन दिनों.



खुबसूरत जब कोई चेहरा* दिखा,      [*फेसबुक पर]
टिपटिपाते फिर रहे है इन दिनों.

M F Husain :
बेच कर घोड़े भी वो सो न सके,
हिन् हिनाते फिर रहे  है इन दिनों,

रंग में ख़ुद ने ही डाली भंग थी,
तिलमिलाते फिर रहे है इन दिनों

'सोच' कपड़ो
* में  भी उरीयाँ हो गयी,      [*केनवास पर ]
मुंह छुपाते फिर रहे है इन दिनों.



तब  ब्रुश था अब है 'कातर'* हाथ में,    [*क़तर देश]
कट-कटाते फिर रहे है इन दिनों.

नंगे पाऊँ,  पर ज़मीं तो ठोस थी,
लड़खडाते फिर रहे है इन दिनों.

होश का सौदा किया था शौक़ में,
डगमगाते फिर रहे है इन दिनों.


थी  महावत, स्त्री-  गज गामिनी,
सूंड उठाये फिर रहे है इन दिनों.

राज-नीति: 
राज नारी पहलवानों* पर करे?        *[मुलायम सिंह]
बड़बड़ाते  फिर रहे है इन दिनों.


चलती गाड़ी* से उतरना पड़ गया,     *[लालू प्रसाद]
दनदनाते फिर रहे है इन दिनों.

हार नोटों का गले जो पड़ गया*,       *[मायावती]
खड़खड़ाती  फिर रही है इन दिनों.

seat की खातिर गवारा SIT भी है,      *[मोदी]
shitशिताते फिर रहे है इन दिनों.

Berth कोई खाली होने वाली है?       ?
दुम हिलाते फिर रहे है इन दिनों.

झोंपड़ी में पौष्टिक खूराक है*,             *[राहुल गांधी]
खटखटाते फिर रहे है इन दिनों.

पार्टी ने छोड़ा*, छोड़ी पार्टी,                 *[उमा भारती]
दिल मिलाते फिर रहे है इन दिनों.


-मंसूर अली हाश्मी 
http://mansooralihashmi.blogspot.in