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Thursday, July 7, 2011

DELHI-BELLY!


देल्ही- बेल्ली !

देल्ही- बेली,
धूम मचेली.

समझ से बाहर,
'उलट' टपेली.
 
फेंकी 'मामू' ने,  
'ईमू' ने झेली.

बात-बात में,
गाली पेली.
 
'shit' बिखराई,
'sheet' है मैली.

उड़ा कबूतर!  
ख़ाली थैली.

अफरा-तफरी,
वोद्दी, येल्ली!

पढ़ी फ़ारसी,
बने है तेली.

गयी चवन्नी,
बची 'अदेली'.

'आत्ममंथन'
एक पहेली!

लिखी पोस्ट ,
और झट से ठेली.
--mansoor ali hashmi 

Tuesday, August 31, 2010

ख़बरों का अकाल

ख़बरों का अकाल 
कैटरीना को अब भी बेहद चाहते हैं सलमान... - 'आज तक'
-३०-०८-१० 

कोई खबर नहीं थी  तो ये भी खबर बनी,
 " 'सल्मां' के दिल से 'केट' तो निकली नहीं अभी."
पहने हुए 'कमीस' थे जाती भी किस तरह,
'शर्ट-इन' था और वोह भी तो दुबली नहीं अभी!
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कॉमनवेल्थ जीओएम को नहीं भाया थीम सांग.... -आज तक [३०-०८-१०]
[कॉमनवेल्थ के इस थीम सांग से जीओएम ही नहीं बल्कि विपक्ष भी संतुष्ट नहीं है. सबका मानना है कि इस गाने में उतनी जान ही नहीं है, जैसी रहमान से उम्मीद होती है.
इस गाने के लिए ए. आर. रहमान को 5 करोड़ रुपए दिए गए थे. और गेम्स समिति का दावा था कि थीम सांग शकीरा के वाका-वाका से कम नहीं होगा. सवाल ये है कि जीओएम और विपक्ष को ही जब थीम सांग नहीं भा रहा है तो ये पब्लिक को कितना पसंद आएगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है.]

कुछ और 'चूना' मिल गया लगने वास्ते,
'पैसे'* तो कर ही लेते है ख़ुद अपने रास्ते, [५ करोड़]
वैसे तो 'वाका-वाका' से कुछ कम नहीं है ये,
इसमें 'शकीरा' होती तो हम भी थे नाचते.
  mansoorali hashmi

Saturday, January 9, 2010

हॉट/HOT



[HOT...HOTTER....HOTTEST........
   Heartthrob Ranbir Kapoor  is India's Most Desirable Man
    in ZOOM Top 50 list.   -T.O.India 8jan.2010]


अबतो पुरुष भी HOT है, बाज़ार की शै है, 
जिंसों के कारोबार में बिकना भी तो तय है.
तअरीफ* ही बदल गयी लिंगो के भेद की,
जो दोनों काम आ सके कहलाते गै है.

*परिभाषा

Tuesday, September 22, 2009

Sallu Miyaa

[With Sallu it is sometimes difficult to keep his shirt on....T. O. I./21.09.09]

Shirt [शर्त?]
पहन लूँ या निकालूं फर्क क्या है,
दिखाऊँ या छुपाऊं हर्ज क्या है,
मैं हर सूरत बिकाऊं शर्त? क्या है,
बताएं कोई इसमें तर्क क्या है?

जो बाहर हूँ, मैं अन्दर से वही हूँ,
मगर Under की दुनिया से नही हूँ,
गलत कितना हूँ मैं कितना सही हूँ,
''दसो-का-दम'' हूँ मैं बेदम नही हूँ.

मिरी हीरोईनों में  तो हया है,
लिबासों में सजी वो पुतलियाँ है,
नही गर एश तो में कैफ* में हूँ,
असिन, रानी है आयशा टाकिया है.

*खुमार

Sunday, July 5, 2009

EMPTY WOOD

खाली वुड


I DON'T NEED TO SHOW MY LEG TO WIN NOTICES -Katrina kaif [T.O.I]

बाला* कद्रो के कदरदान जब तलक मौजूद है,
घुटनों या पाओं तलक हरगिज़ न जाना चाहिए.

CENSOR की कैंचिया हो जाये 'बूथी' इससे कब्ल,
बिक्नियों की बिक्रियों को रोक देना चाहिए.

Gay-परस्ती को बढावा देने वाले है यहीं,
निर्बलों को भी कभी नोबल दिलाना चाहिए.

Laughter show सी कहानी अब सफल होती यहाँ,
लेखको को काशी-मथुरा भेज देना चाहिए.

राज-नीति में अदाकारों की अब भरमार है,
शीश महलो से निकल जूते चलाना चाहिए.

आर्ट को फिल्मों में ढूंढे ? कोई मजबूरी नही,
SHORT से भी शोर्ट में अब तो छुपाना चाहिए.

*ऊपरी

Saturday, September 20, 2008

Shammi Kapoor

शम्मी कपूर

एक समय में अरब मुल्को में खासकर लेबनान,जोर्डन ,कुवैत वगेरह में शम्मी कपूर का जादू चलता था। 'जंगली' वाला ज़माना था वह। याहूँ तो यहाँ खूब गूंजा, सिर्फ़ नौजवानों में ही नही सब तबको में। 'याहूँ'  काल की यादें  आज भी पुराने लोगों के दिलो में स्थापित है। desktop पर पहुँचने वाला याहू भी इसी नस्ल का है, इसका मुझे कोई अंदाज़ नही।

फिर 'तीसरी मन्ज़िल के musical songs ने भी हम से ज़्यादा अरबो को ही नचाया था। शम्मी कपूर की कद-काठी , रंग-रूप में अरब लोगों को अपने जैसी ही झलक मिलती थी । खासकर तबियत की 'शौखी'  इसको तो ये लोग अपनी ही विरासत समझते है।

शम्मी कबूर [अरबी भाषा में 'प' स्वर के आभाव से बना उच्चारण] का दो दशक तक यहाँ एक छत्र राज कायम रहा।

इन देशो के मूल निवासियों के अतिरिक्त यहाँ बसे हुए एशियन मूल के लोगों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा भारतीय रंगकर्मियों और फिल्मो की लोकप्रियता को बढ़ावा देने में।

अब ग्लोबलाइजेशन के दौर में कलाकारों को जो 'मेवा'  खाने मिल रहा है, वह उनकी सेवाओ के मुकाबले में कई गुना ज़्यादा है। भाग्यशाली है आज के अनेक कलाकार!

एक और भारतीय सांस्कृतिक राजदूत 'शम्मी कपूर' को मेरा सलाम।

मंसूर अली हाश्मी [मिस्र से]

Wednesday, September 17, 2008

amitabh bachchan

अमिताभ बच्चन

जवाब सुनकर की यह मैं indian हू, प्रति-क्रिया में उसने पहला शब्द यही कहा..... अमिताभ बश्शन ? और फ़िर आधा दर्ज़न अमिताभ की फिल्मो के नाम गिना दिए,'मर्द' , 'कुली' वगेरह! यह बात ३ सितम्बर 2008 को हुई , यहाँ , मिस्र {egypt} में. यह कोई एक egyptian की बात नही, और भी कई नौ-जवानों से यह तजुर्बा हुआ. यानी अब मिस्र की नई पीढी के लिए भारत की पहचान एक कलाकार है [राष्ट्रपति नासिर के ज़माने में लोगो के लिए नेहरू का नाम भारत की पहचान होता था]. राजनीती , धर्म, कला व् संस्कृति के प्रति  जागरूक मिस्र-वासियों की नई पीढी में कला को पहचान के मध्यम में उपरी क्रम में रखना आश्चर्य-जनक लगा, एक सुखद आश्चर्य!
एक तरफ़ मानव समाज में [अगर हम भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखे तो] जिस संकुचितता का आभास , विशेषकर दलीय राजनीती जनित नई वर्ग और वर्ण व्यवस्था जो की  जाती , धर्म , भाषा , प्रदेश, जिला हर स्तर पर लोगों को बांटती हुई नज़र आती है, में देश की पहचान का तत्व कम ही दीखता है,. यह तो शुक्र है की खेलो [sports] और कला जगत ने एक हद तक हमारे वासुदेव कुटुम्भकम के आदर्श की लाज रखी है.
हाँ , तो बात मैं मिसरी नौ-जवान की कर रहा था की पटरी बदल गई!....उसके मुंहसे अमिताभ का नाम सुन कर जिस आत्मीयता का अहसास हुआ वह वर्णन से परे है! बश्शन इसलिए बोलते है की अरबी में 'च' उच्चारण वाला शब्द ही नही है [जबकि ये लोगचाय खूब पीते है.
अन्य मिसरी नौ-जवानों ने अमिताभ की फिल्मो के नाम लिए बल्कि उसके फिल्मी डायलाग बोले और गीत भी गुन-गुनाए , जबकि वे इस भाषा से नितांत अपरिचित है.
कला जगत की ये विशेषता है की यह देश,धर्म आदि सीमओं में नही बंधता. कलाकार ही हमारे सच्चे राजदूत है विश्व कैनवास पर.

-मंसूर अली हाश्मी [मिस्र से]