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Saturday, February 4, 2012

'धोया' किसी ने भी हो 'सुखाया' हमीं ने है !


'धोया' किसी ने भी हो 'सुखाया' हमीं ने है !


गणतंत्र का मज़ाक उड़ाया हमीं ने है,
भ्रष्टो को सर पे अपने बिठाया हमीं ने है.

जो लूट कर चले गए, वो तो थे ग़ैर ही,
फिर उसके बाद; लूट के खाया हमीं ने है.

खेलो में हार-जीत तो होती ही रहती है !
दोनों ही सूरतो में कमाया हमीं ने है !!


"घोटाला करके बच नहीं सकता कोई यहाँ"
इस 'सच' को कईं  बार 'झुठाया' हमीं ने है !

'थप्पड़' भी खाके, दूसरा करते है 'गाल' पेश,
घर जाके 'बादशा'* को मनाया हमीं ने है.        *SRK
Note: {Picture have been used for educational and non profit activies. If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture.}
--mansoor ali hashmi