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Sunday, December 15, 2013

गुफ़्तगु……!

         

         गुफ़्तगु……Leaks!

केजरीवाल:   "सर, कार के लिए, हमें लाइसेंस चाहिए। "

राहुल:         " हाज़िर है मेरी कार, अजी बैठ जाईये। "

केजरीवाल:    "वैसे तो पा-प्यादा ही चलने कि खू* हमें            *आदत 
                  बैठे भी कभी गर है, तो अनशन ही पे बैठे !"
    
                  "फिर भी है अगर ज़िद तुम्हे, शर्तें करो पूरी 
                   दिल (ली) वालों की हसरत नही रह जाए अधूरी। "

राहुल:           "लाये है 'लोकपाल' हम, ख़ातिर ही तुम्हारे,
                   न भी नहीं कह पाये अब 'अण्णा' भी बिचारे। "

                   " तेरह-दिनी सरकार* पे, हम ही थे मेहरबाँ    *बाजपाई जी की 
                    चौदह* के लिए ढूँढ रहे है कोई (बे) चारा !"          *२०१४ 

 -- mansoor ali hashmi 
http://mansooralihashmi.blogspot.in    खंडित जनादेश
Note: {Pictures have been used for educational and non profit activies. If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture. - See more at: http://mansooralihashmi.blogspot.in/#sthash.t1yDk2Qd.dpuf

Tuesday, November 8, 2011

B. P. L.



ये किसका इंतज़ार है ?


ग़रीबी रेखा पार करने में जो मददगार है,
उसी  में भ्रष्टाचार है, उसी से भ्रष्टाचार है.

शिकारी भी भ्रष्ट गर शिकार भ्रष्टाचार है. 
वो कह रहे है अब तो ये लड़ाई आर-पार है.

वो चाह इन्किलाब की तो कर रहे मगर यहाँ, 
बने है अनशनो के रास्ते,  तो  त्यौहार है. 

समीकरण है ठीक, बात फिर  भी बन नहीं रही,
यहाँ है चौकड़ी अगर, वहां भी यार चार है.

हरएक टोपी छाप की दवा नहीं है कारगर,
है अन्ना केवल एक, और मरीज़ तो हज़ार है.

Note: {Pictures have been used for educational and non profit activies. 
If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture.}
--mansoor ali hashmi 

Sunday, August 21, 2011

कौन ? आर.एस.एस.! ,C.I.A. !, पाकिस्तान ! OR ...?


कौन ?  आर.एस.एस.! ,C.I.A. !,  पाकिस्तान ! OR ...?

हस्ती को जो अपनी यूं मिटा लेता है यारों,
Unknown को  अण्णा वो बना देता है यारों.

'जन-लोक' अगर बन नहीं पाया है तो हुशियार !
सैलाब वो जन-जन में उठा देता है यारों.

जन भावना राहत में हो, आह़त हो अगर तो,
सरकार बना देता, हटा देता है यारों. 

अब 'राम की लीला' पे है अण्णा को भरोसा,
भ्रष्टो को जो आखिर में सज़ा देता है यारो !
   
--mansoor ali hashmi 

Friday, August 12, 2011

Reality


हर जगह मेरा जुनूँ  रुसवा हुआ !

# विष्णु बैरागी ने जब फतवे पे इक 'फ़तवा'* दिया,   *एकोऽहम्अज्ञान का आतंक
   चौंके पंडित और मुल्ला भी अचंभित रह गया.

# हर गली हर मोड़ पर अन्ना पढ़ा, अन्ना सुना,
   भ्रष्ट चेहरों पर मगर आई नज़र मक्कारियां. 

# "खेल ये क्रिकेट हमारा है", बड़ी अच्छी तरह,
   घर बुला कर हमको गौरो ने तो बस समझा दिया.

# दासता से मुक्त गांधी ने अगर करवाया तो,
   मुश्किलों के वक़्त में जे.पी. कभी अन्ना मिला.

# नाम अपने देश का  जग में बहुत चमका दिया,
   कैग [CAG]  कहता है ज़रूरत से अधिक खर्चा किया.


# सबसे ज़्यादा है अगर दौलत तो 'भगवानो' के पास !
   'नास्तिक' तू गुमरही में अब तलक भटका हुआ !!

# भीड़ से बचने को 'आरक्षण' ज़रूरी है अगर,
   क्या हुआ ! मैंने जो अपना आज 'रक्षण' कर लिया? 

# I.A.S. और  I.P.S. , 'प्रदेश' से बढ़ कर नही,
   जो 'गुजरता' जा रहा था क़ैद* क्यूँ उसको किया ?        *Record

-Mansoor ali Hashmi