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Wednesday, December 25, 2013

दर पे अपने आज फिर इक थाप है !








दर पे अपने आज फिर इक थाप है !

ज़िक्र जिसका 'आम' है वो 'आप' है 
रिश्वतों का लेना-देना पाप है !

'ईश्वर' को भूल बैठे लोग याँ 
'आसुमल'* का कर रहे अब जाप है।        *आसारामो का 

आंकड़ो की उलझनो में क्यों पड़े 
आजकल परफेक्ट ! 'ज़ीरो' नाप है। 

फैसलो पर लग रहे है प्रश्न-चिन्ह?
कोर्ट है, पंचायते है, 'खाप' है  

दोस्तों की अब ज़रूरत ही कहाँ ?
पाल रक्खे आस्तीं में सांप है। 

टी वी चैनल, ख़बरें हो या कि ब्लॉग, 
'आप' है, बस आप है, बस आप है !

सारे 'घपलो' की थी माँ 'बोफोर्स' गर,
'ज़िंक'* को क्या मान ले कि बाप है ?           *हिंदुस्तान जिंक scam

'Tea"  के कप में आ गया है गर उबाल,
उसकी मंज़िल तो यक़ीनन टॉप है !

--mansoor ali hashmi