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Wednesday, August 14, 2013

नज़र आ रहा हर कोई हक़्क़ा-बक़्क़ा !


[सभी बलागर साथियो , भारतवासियों को ६७ वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई।]
नज़र आ रहा हर कोई हक़्क़ा-बक़्क़ा !  

'वो-डरा'*  हुआ तो नहीं लगा,                *[रोबर्ट]
बड़ा 'नेता' उसका कोई 'सगा' !

ये ज़मीनी सौदों के मामले, 
मेरा मुल्क इससे रहा ठगा. 

जो 'कलश'* लिए था निकल पड़ा,     *चेन्नई एक्सप्रेस 
ले के १०० करोड़ भी न रुका !
**
जो 'शतक' की और है बढ़ रहा,
वो 'प्याज़' हमको गया रुला. 

जो कि'डूबना' ही तो था 'मदार'*           *[काम/function,पर आधारित]
इसे* कौन काम लगा गया ???              *[INS सिन्धु पनडुब्बी को]

है 'चुनोती'* बोल के देखिये,                 *[मोदी की]
फतह* कौन करता यहाँ किला .               *[स्वतंत्रता दिवस के भाषण में]

--mansoor ali hashmi 

Sunday, January 9, 2011

हम लोग

हम लोग 




'द्रोण' जैसे 'गुरु' है तो यह तो होना है,
'अंगूठे' आज भी अपने कटा रहे हम लोग.

विदेशी लूटेगा कैसे 'सुनहरी चिड़िया' अब,
उन्ही के 'खातो' में 'लक्ष्मी' छुपा रहे हम लोग.


प्याज़ ही में ये दम था रुला सका हमको,
वगरना, बेटी, बहू को रुला रहे हम लोग.

धमाकों में भी तो, 'आनंद' 'असीम' है यारों, 
'उड़ाके' ख़ाक दिवाली मना रहे हम लोग.

नए ज़माने में, पीछे क्यों हम ही रह जाते,
स्वयं को लूट के देखो कमा रहे हम लोग.

अब इन्किलाब कि बाते हमें पसंद नही,
'स्वतंत्रता' ही को 'बंदी' बना रहे हम लोग.
Note: {Picture have been used for educational and non profit activies. If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture.}
-मंसूर अली हाश्मी