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Sunday, February 8, 2009

kaleidocopic view

 बनना 

बस्ती जब बाज़ार बन गयी,
हस्ती भी व्यापार बन गयी।

भिन्न,विभिन्न मतो से चुन कर,
त्रिशन्कु सरकार बन गयी।

लाख टके की बात सुनी थी,
सुन्दर नैनो कार बन गयी।














अपनी ही लापरवाही तो,
आतंक का हथयार बन गयी।

लोक-तन्त्र की जय-जय,जय हो,
राजनीति घर-बार बन गयी।
Note: {Pictures have been used for educational and non profit activies. 
If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture.}
-मन्सूर अली हाशमी