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Tuesday, August 23, 2011

Whitewashed !


धोए गए कुछ ऐसे कि बस साफ़ हो  गए !

धोए गए बुरी तरह इस मानसून में,
वैसे भी तर-ब-तर* तो थे इस माहे जून में.

[*बहुत सारी जीत और पैसा कमाया था पिछले ही महीने [जून] तक ]

चारो गँवा के बैठ गए अबतो खाली हाथ,
आता नहीं है जोश क्यूँ अब अपने खून में.

एक 'सैंकड़ा' सचिन अगर ले आता साथ में,
ख़ुश होके भूल जाते सभी कुछ  जुनून में.

बल्ले नहीं चले मगर इस बार गेंद भी,
'गोरो' को लग रही थी  Honey जैसी  Moon में.

अपनी अपेक्षाए ही हमको तो 'छल' गई,
हम है कि ढूँढते है उसे कोई  Goon*  में.          *ठग 
 
--mansoor ali hashmi 

Friday, August 12, 2011

Reality


हर जगह मेरा जुनूँ  रुसवा हुआ !

# विष्णु बैरागी ने जब फतवे पे इक 'फ़तवा'* दिया,   *एकोऽहम्अज्ञान का आतंक
   चौंके पंडित और मुल्ला भी अचंभित रह गया.

# हर गली हर मोड़ पर अन्ना पढ़ा, अन्ना सुना,
   भ्रष्ट चेहरों पर मगर आई नज़र मक्कारियां. 

# "खेल ये क्रिकेट हमारा है", बड़ी अच्छी तरह,
   घर बुला कर हमको गौरो ने तो बस समझा दिया.

# दासता से मुक्त गांधी ने अगर करवाया तो,
   मुश्किलों के वक़्त में जे.पी. कभी अन्ना मिला.

# नाम अपने देश का  जग में बहुत चमका दिया,
   कैग [CAG]  कहता है ज़रूरत से अधिक खर्चा किया.


# सबसे ज़्यादा है अगर दौलत तो 'भगवानो' के पास !
   'नास्तिक' तू गुमरही में अब तलक भटका हुआ !!

# भीड़ से बचने को 'आरक्षण' ज़रूरी है अगर,
   क्या हुआ ! मैंने जो अपना आज 'रक्षण' कर लिया? 

# I.A.S. और  I.P.S. , 'प्रदेश' से बढ़ कर नही,
   जो 'गुजरता' जा रहा था क़ैद* क्यूँ उसको किया ?        *Record

-Mansoor ali Hashmi