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Tuesday, July 31, 2012

ऐसा बोलेंगा तो !

ऐसा बोलेंगा  तो !

'कांसो'* पे भी संतोष जो करले; हमी तो है,           *[कांस्य पदक]
'सोने' से अपने 'ख़्वाब'  को भरले; हमी तो है.

'मनरेगा'  से भी पेट जो भर ले हमी तो है,    [म. गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना] 
भेंसो के चारे को भी जो चर ले हमी तो है.

रिश्वत से काम लेने की आदत सी पड़ गयी,
कागज़ की  नाव पर भी जो तर ले हमी तो है.

"पेशाब कर रहा है गधा इक खड़ा हुआ",
दीवारों पे लिखा  हुआ पढ़ ले हमी तो है !

'बोफोर्स' हो , 'खनन' कि वो 2G ही क्यों न  हो,
'आदर्श' हरइक घपले को कर ले  हमी तो है.

--mansoor ali hashmi 

Friday, July 27, 2012

वानप्रस्थ आश्रम !


वानप्रस्थ आश्रम !

'एन. डी.' मोहतरम (!),
दुष्करम(!) - सुफलम(?)

शुक्रवारी शुभम,
पुत्र-रत्न, प्राप्तम.

'डी.एन.ए.' बेरहम ,
तौड़ डाले भरम.

है विजित 'शेखरम',
बाप है बेशरम.

रास्ता इक बचा,
वानप्रस्थ आश्रम!






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-Mansoor ali Hashmi

Saturday, July 14, 2012

मान सरोवर [Mansoor's OVER !]

मानसर = मान सरोवर  [ मनसूर ]

[लिक्खे है ये 'वडनेरकर', शब्दों का कर लीजे सफ़र......‘मानसर’ की खोज में..










'तिब्बत' में है , 'जम्मू' में भी प्रसिद्द झीले 'मानसर',
साझी विरासत देखिये, आधी इधर-आधी उधर.

गिरता हुआ स्तर नज़र, आया है शिष्टाचार में,
'विद्यार्थी' शिक्षक से अब कहता है, मेरी 'मान Sir'.

'सागर' भी कहते 'झील' को, कोई 'नहर' तो 'मानसर',
'बहना' ही है इसका चरित्र, सर-सर-सरर, सर-सर-सरर. 

'मानस' 'सरोवर' से मिला, ज्ञानी बना, जीवन सफल, 
दुःख सह के जो 'तीरथ' गया, है कामयाब उसका सफ़र.

'मन्सूर' का भी लक्ष्य है, जीवन 'सरोवर' सा रहे,
ठहराव न आये कभी, कितनी भी मुशकिल हो डगर.


[मिलता उधार है यहाँ, शर्ते बड़ी आसानतर,
ले-ले क्रेडिट कार्ड और, तू एश से करना बसर.]
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mansoor ali hashmi 

Tuesday, July 10, 2012

तब और अब

"मेरे दफ्तर में इक लड़की है , नाम है राधिका" ...पर........."पेरोडी"
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तब और अब 











मेरे घर में एक पत्नी है, नाम है 'मलिका'
छः 'भय्यो' की 'बहना' है, वाह भई, वाह भई, वाह !
गोरी है, चिट्टी है, वाह भई, वाह भई, वाह.

सबसे पहले मिली जहां, 'हाजी-माँ' का घर था,
इंटरव्यू के लिए गया, लेकिन मन में  डर था,
छः 'सालों' की फ़ौज खड़ी थी, वाह भई, वाह भई, वाह!

चाय लिए जब आई पहने 'हरा दुपट्टा'; व़ो ,
हाथों में कम्पन थी उसके, मन में था खटका,
मार के लाई थी 'बालाई'* वाह भई, वाह भई वाह !

*बालाई= मलाई    






चाय बनाना अबतो, ख़ुद को ही पड़ती  है,
बालाई नदारद , चीनी कम डलती है,
'कप' भी अपना ख़ुद धोते है, वाह भई, वाह भई, वाह ! 
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-- mansoor ali hashmi 

Thursday, July 5, 2012

con (कण) CERN

con (कण) CERN 






कितने टनों को तौड़ कर इक 'कण' को पा लिया है,
हर्षित है दुनिया वाले, 'जीवन' को पा लिया है !
कण-कण में था वो पहले, अब 'कण' वो बन गया है,
भगवन ने भी अब अपने 'भगवन' को पा लिया है !!



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-- mansoor ali hashmi