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Friday, January 14, 2011

यह कैसा शहर है....!

यह कैसा शहर है....!


["शब्दों  का  सफ़र "  के  आज  के .... .   फ़रमान सुनें या प्रमाण मानें  से प्रेरित,,,]


'नापा' है चाँद जबसे, मअयारे हुस्न बदला,  
पैमाना-ए-नज़र अब माशूक की कमर है.















'प्रमाणम'* काम आते अब [जनम] पत्रियो के बदले, 
ज्योतिष की क्या ज़रूरत 'भौतिक' पे अब नज़र है.

'फरमान' है- कि गिर न पाए ग्राफ अपना,
महंगाई बढ़ रही है, ये भी तो ख़ुश ख़बर है. 

आतंक लाल-हरा था, भगवा भी बन रहा है,
'फरमा' रहे है हाकिम, हमको तो सब ख़बर है. 

पी.ए.सी., जे.पी.सी. भी लाएगी क्या नतीजा,
सारे सबूत जबकि होते इधर-उधर है.


 [*नापतौल/ आकर-प्रकार ]


Note: {Picture have been used for educational and non profit activies. If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture.}
-मंसूर अली हाश्मी 


# मकर सक्रान्ती की हार्दिक बधाई,  सभी ब्लागर एवम पाठक साथियों को.
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