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Thursday, 28 August, 2008

अक्कल दाढ़

अब जो 'अक्कल की दाढ़'* आयी है,
यह blue tooth मेरे भाई है।

हो के दांतो पे यह सवार मेरे,
virus अपने साथ लायी है।

दांत तो मुझको फ़ल खिलाते है,
यह तो मुझको ही काट खायी है।

गुप्त file की तरह खुल बैथी,
michel Angelo ताई है?

Dentist कह्ते है delete करो,
यह तो अपनी नही पराई है।

मैरी संसद मे जब से आ बैठी,
'मत' अविशवास ही का लायी है।

हाशमी सोचते हो क्यों इतना?
यह किसी और की लुगाई है।

तर्क करदो तलाक दे डालो,
तीन लफ़्ज़ो* की तो दुहाई है।

मन्सूर अली हशमी

*wisdom teeth
*तलाक,तलाक,तलाक

6 टिप्पणियाँ:

दिनेशराय द्विवेदी said...

वाह! वाह! मंसूर अली जी, वाह! क्या तबीयत पाई है आप ने। मजा आ गया। हमने तो ये अक्कल दाढ़ अपने पीसी में घुसने ही नहीं दी।
वैसे इसे डिलिट करने की कहाँ जरूरत है? किसी अच्छे से एन्टीवायरस का उपयोग करें। फिर यह खूब काम करेगी। और तीन लफ्जों से काम यहाँ नहीं चलने का।

Udan Tashtari said...

बहुत सटीक!!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

Excellent poem Hashmi Ji!
Keep it up.

कामोद Kaamod said...

अब जो 'अक्कल की दाढ़'* आयी है,
यह blue tooth मेरे भाई है।

मंसूर जी, यह 'अक्कल की दाढ़' तो वाकई खतरनाक मालूम पड़ती है. :)

seema gupta said...

अब जो 'अक्कल की दाढ़'* आयी है,
यह blue tooth मेरे भाई है।
' ha ha ha ha wah, very intersting post to be read"

Regards

Anonymous said...

A great sense of humour with with presicion in expressing is a very rare thing and a valuable gift from god.
congratulations on having such a beautiful expression for technology ...